एक विचार में दुनिया को बदल देने की ताकत होती है। किसी विचार ने विपरित परिस्थिति में न सिर्फ़ व्यक्ति के मनोबल को बढ़ाया है, बल्कि बहुत बार इतिहास की दिशा भी बदली है। हर साल मार्च का महीना इंटरनेशनल आइडियाज मंथ के रूप में मनाया जाता है। मार्च विचारों के महत्त्व को प्रोत्साहित करने और उन्हें साझा करने का महीना है। दुनिया के तमाम आविष्कार और बड़े परिवर्तन एक विचार यानी आइडिया की ही देन हैं। विचार का पनपना मनुष्य होने का सूचक है। इसके बिना जीवन में स्थायित्व आ जाता है और समाज की प्रगति रुक जाती है।
साहित्य में नोबेल पुरस्कार विजेता जॉर्ज बर्नाड शॉ कहते हैं कि, 'यदि आपके पास एक सेब है और मेरे पास भी एक सेब है और हम इन सेबों का आदान-प्रदान करते हैं तो आपके और मेरे पास अभी भी एक-एक सेब होगा। लेकिन, यदि आपके पास एक विचार है और मेरे पास एक विचार है और हम इन विचारों का आदान-प्रदान करते हैं, तो हममें से प्रत्येक के पास दो विचार होंगे।'
भारत में नवचेतना व नवसृजन के लिए बसंत ऋतु का समय उपयुक्त माना गया है। यहां मार्च से मई तक वासंती प्रेरणा से नयेपन को महसूस किया जा सकता है। ऋतुएं हमें सिखाती हैं कि मानव जीवन गतिशील है। यह गतिशीलता नवोन्मेष, सृजनशीलता और नए संकल्प का द्वार खोलती है। यह समय मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी तनाव को दूर करने वाला होता है। इसलिए व्यक्ति स्वतः निराशा को त्याग आशा की ओर बढ़ जाता है। उसके अंदर वैचारिक उत्साह, उमंग और उल्लास का समावेशन होने लगता है। यह मौसम हमारे लिए अवसरों की नई खिड़कियां खोलता है। बसंत में बीज अंकुरित होकर फूल बन जाते हैं। जीवन के भी खिल उठने के लिए विचार का अंकुरण बहुत जरूरी है। मार्च का यह महीना व्यक्ति को लीक से हटकर सोचने-विचारने का सही अवसर देता है।
इंटरनेशनल आइडियाज मंथ का प्रस्ताव सन 2000 में यूएस की विस्कॉन्सिन-मैडिसन यूनिवर्सिटी के छात्रों द्वारा दिया गया था। इसका उद्देश्य लोगों को अपने विचार की शक्ति को पहचानने, उसे साझा करने और उस पर अलग ढंग से काम करने के लिए प्रेरित करना है। इसके तहत आइडिया-जेनरेशन कार्यशालाएं, ब्रेनस्टोर्मिंग सत्र और रचनात्मक सोच पैनल जैसे कार्यक्रम छात्रों द्वारा आयोजित किए जाते हैं।
इतिहास में किसी विचार का महत्त्व :-
विचार की शक्ति और उसके परिणाम हर युग में देखे जा सकते हैं। आधुनिक युग की सबसे बड़ी परिघटना पुनर्जागरण और औद्योगिक क्रांति की उत्प्रेरक व चालक शक्तियां 'विचार' ही थे। तब छापेखाने की स्थापना का विचार किसी के मस्तिष्क में आया होगा। इस एक विचार ने बेजुबान समाज को ज़बान दी। किताबें छपी और दुनिया भर में गुणात्मक व परिमाणात्मक परिवर्तन हुए। पुनर्जागरण के दौरान अंकुरित हुए विचार प्रबोधन-काल में भरपूर फले-फूले। इसने यूरोप ही नही, संपूर्ण विश्व में बड़े परिवर्तन के लिए वैचारिक पृष्ठभूमि तैयार कर दी। विचार के प्रकटीकरण का जो मार्ग बन्द हो गया था, वह खुल गया। ऐसे ही विचारों की कोख से आधुनिकता ने जन्म लिया।
एक विचार ने ही कोलम्बस और वास्को-डी-गामा को भौगोलिक खोज करने के लिए प्रेरित किया। किंतु, विचार केवल भौगोलिक ही नही, वैचारिक खोज भी करते हैं। आज की नई दुनिया विचारों के क्षेत्र में ही ढूंढी जा रही है। मनुष्य ने प्रकृति के रहस्यों से पर्दा हटाकर अपने शारीरिक और मस्तिष्क के ज्ञान का विस्तार कर लिया है। मानवीय विचार ने आज विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन कर एक ऐसी ज़मीन प्रस्तुत कर दी, जिसमें व्यक्ति अपने उच्चतर जीवन का बीजारोपण कर सकता है। अनेक विचारकों का मानना है कि अब तक का मानवीय इतिहास विचारों का ही इतिहास रहा है। यह जगत, विचार का ही प्रतिबिंब है। उनके अनुसार दुनिया में तमाम परिवर्तनों का कारण विचार ही हैं।
इतिहास की तीन बड़ी क्रांतियां (इंग्लैंड, अमेरिका, फ्रांस) प्राकृतिक अधिकार के विचार पर ही केंद्रित थी। जर्मन कवि हेन ने फ्रांसीसियों को चेताया था कि वे एक विचार की शक्ति को कम न आंके। एक विचार समूची सभ्यता को नष्ट करने की ताकत रखता है। अमेरिका में 'आधुनिक नागरिक अधिकारों' की जननी रोजा पार्क्स के मन में किसी श्वेत व्यक्ति के लिए बस में सीट न छोड़ने का ख्याल आया। उनके इस एक विचार के कारण नागरिक अधिकार की ऐसी लहर उठी, जिसकी गूंज पूरे अमेरिका में सुनाई दी। इतिहास में उसी का नाम दर्ज़ है जिसने अपने विचार की शक्ति को पहचाना और उस पर दृढ़ता से काम किया।
बड़ा परिवर्तन छोटे-से विचार की पैदाइश है :-
कोई भी बड़ा परिवर्तन हमेशा एक साधारण विचार से ही शुरू होता है। मानव-व्यवहार के विशेषज्ञ रॉबर्ट ओल्सन का कहना है कि, हर नया विचार शुरू में पागलपन भरा लगता है। प्रत्येक व्यक्ति के मस्तिष्क में विचार उत्पन्न होते हैं। किंतु, बहुत-से लोग उसे केवल एक दिमागी गतिविधि मानकर उस पर अमल नही करते। तो कुछ उस पर गहराई से मंथन करते हैं। हर व्यक्ति के अंदर एक खोजकर्ता होता है। वो बस बाहर आने का इंतज़ार कर रहा होता है।
पहिए, भाप इंजन, बल्ब, हवाई जहाज, कैब सेवाएं, इलेक्ट्रिक गाड़ी, मोबाइल, लैपटॉप, फूड डिलीवरी, OTT जैसे तमाम विचार पहले किसी के मस्तिष्क में आए ही होंगे। ऐसा ही कोई-न-कोई विचार हम सबको भी सूझता है। बस जरूरत उस पर दृढ़ता से मंथन करने की है। अनेक असफलताओं के बावजूद थॉमस एडीसन इस विश्वास पर डटे रहे कि उनका एक विचार दुनिया को बदल देगा। अंततः वे सफल हुए।
किसी विचार को कैसे संकलित करें :-
एक विचार किसी भी वक्त या अवस्था में आ सकता है। वह कोई काम करते हुए, निठल्ले बैठे हुए, खेलते या नहाते हुए आ सकता है। वह विचार कुछ भी हो सकता है। जैसे चित्रकला, लेखन, खेल, फिल्म, यात्रा, तकनीकी इत्यादि। कोई विचार आ सकता है कि खाने का, पढ़ने का, लिखने का नया तरीका कैसे ईजाद किया जाए। कैलीग्राफी (लेखन से जुड़ी एक कला) अथवा शब्द अभ्यास का विचार आ सकता है। पर, भागदौड़ भरी इस ज़िंदगी में किसी विचार को याद रखना एक बड़ी चुनौती है।
इसके लिए विचारों की एक सूची बनाकर उन्हें लिखा जा सकता है। मोबाइल के नोटपैड या बिस्तर के सिरहाने नोटबुक रख कर विचारों को संकलित किया जा सकता है। कई महान लोग सोने जाते समय बिस्तर के पास पैन और नोटबुक रखते थे। ओशो के सहपाठी बताते हैं कि कॉलेज से घर के रास्ते में किसी नए विचार के आने पर ओशो वहीं किसी छायादार पेड़ ने नीचे बैठ कर उसे लिखने लगते थे।
जब अच्छा विचार मिल जाए तब ख़ुद से सवाल पूछें कि अब इस पर बेहतर तरीके से कैसे काम किया जा सकता है? इस तरह थोड़े-से प्रयास द्वारा एक साधारण विचार को असाधारण बनाया जा सकता है। हममें से कोई नहीं जानता कि हमारा कौन-सा विचार दुनिया को बेहतर बना दे।
क्रियान्वयन सबसे जरूरी :-
सबसे जरूरी बात किसी विचार के क्रियान्वयन की है। कोई विचार केवल बौद्धिक विलास तक सीमित न रहे। उसे व्यावहारिक रूप देना बहुत जरूरी है। माल्टीस मनोचिकित्सक एडवर्ड डी. बोनो के अनुसार, 'एक कार्यरूप में लाया गया विचार उस विचार से महत्त्वपूर्ण है जो केवल एक विचार के रूप में ही विद्यमान रहता है।' गांधी का यह दृढ़ मत था कि कार्यरूप दिए बिना कोई भी अच्छा विचार अर्थहीन है।
किसी संगठन में विचार की अहमियत :-
व्यावहारिक समस्या-समाधान हेतु किसी संगठन में सभी सदस्यों को विचार-मंथन करने के लिए प्रेरित करना चाहिए। भले ही समूह-सदस्य अपने क्षेत्र के विशेषज्ञ न हों और नेतृत्व उस विचार के साथ आगे न बढ़ना चाहे, अर्थात् वह उससे सहमत न हो। फिर भी, किसी विचार को साझा करने की संस्कृति विकसित करनी चाहिए। इससे समूह-सदस्यों की वैचारिक क्षमता तो निखर कर आती ही है, वे सहजता और आत्मविश्वास का अनुभव भी कर पाते हैं। यूनानी दार्शनिक सुकरात के अनुसार, जब दो विरोधी विचार टकराते हैं तो अंत में एक नया और संतुष्ट विचार निकल के आता है।
प्रशासन के आधुनिक विचारकों का मानना है कि संगठन में प्रत्येक व्यक्ति के विचार सर्वोच्च महत्त्व के हैं। प्रबंधन को चाहिए कि वह निर्णय-निर्माण प्रक्रिया में सभी सदस्यों को शामिल करे। उत्पादन पूंजी के साथ वैचारिक पूंजी को भी महत्त्व दिया जाना चाहिए। इस दृष्टिकोण की वकालत करने वाले एक प्रशासनिक विचारक एल्टन मेयो का कहना था कि, 'यदि हमारे तकनीकी कौशल के साथ-साथ वैचारिक और सामाजिक कौशल भी विकसित हो गया होता तो द्वितीय विश्व युद्ध नही होता।' इसलिए किसी संगठन को बेहतरीन बनाने और उसमें एक समावेशी वातावरण के सृजन के लिए हर प्रकार के विचार को स्थान देना आवश्यक है।
विचार कभी मरता नही :-
एक विचार हमेशा ज़िंदा रहता है। यूनानी सत्ता ने जब सुकरात को ज़हर देने का हुक्म दिया तो उन्होंने लोगों से कहा कि, ये ज़हर देकर मुझे तो मार सकते हैं, पर मेरे विचारों को नही। मेरे विचार जीवित रहकर दुनिया में सदैव गूंजते रहेंगे। इसलिए जब तक विचार ज़िंदा है, एक शानदार भविष्य की उम्मीद हमेशा बनी रहेगी। विचार वर्तमान के साथ भविष्य को भी आकार देते हैं। विचार की नदी में ही सृजन की लहरें उठती हैं। विचार के बिना किसी संस्कृति की कल्पना नही की जा सकती।
एक विचार बुरा भी हो सकता है। या फिर यह कह लीजिए कि कोई विचार बुरा नही होता, बल्कि उसका उपयोग गलत तरीके से किया जा सकता है। जैसे, द्वितीय विश्व युद्ध के समय वैज्ञानिकों के दिमाग में परमाणु को विखंडित करने का विचार आया। इससे परमाणु बम का इजाद हुआ। इस विचार ने दुनिया को विनाश की ओर धकेल दिया। पर, दुनिया आशावाद पर टिकी है। हमें उम्मीद रखनी चाहिए कि अच्छे विचार एक से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचे, ताकि एक ऐसे सुंदर भविष्य का निर्माण हो जहां प्रेम और आनंद भरपूर चरितार्थ हो सकें।
अतः इस इंटरनेशनल आइडियाज मंथ पर एक-दूसरे के विचार की सराहना करें। अपने ज्ञान को खुले तौर पर साझा करें। इस अवसर पर अपने उस विचार पर मंथन जरूर करें, जिसके बारे में आपने केवल सोच रखा है, पर अब तक उस पर गहनता से कार्य नही किया है। नवाचार शून्य में पैदा नही होते। विचार के प्रति उत्साही होने से ही नवाचार के रास्ते खुलते हैं। इसके लिए आप दोस्तों के साथ विचार-मंथन पार्टी आयोजित कर सकते हैं। दो लोग मिलकर कोई कहानी लिख सकते हैं। विचार रचनात्मकता के प्रवाह को कई गुना बढ़ा देता है। इसलिए, इस महीने से अपने अब तक के सबसे अच्छे विचार पर काम करना शुरू करें। दुनिया को बेहतर बनाने की दिशा में अपना योगदान सुनिश्चित करें।